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Gujarat's ASHA Workers' Protest At Jantar Mantar, Delhi

नमस्कार ! नहीं मैं रवीश कुमार नहीं , पर यदि आप टीवी पर आने वाली प्राइम टाइम डिबेट्स में अभी भी रूचि रखते है तो ये ज़रूर पढ़े क्यूंकि ज़ाहिर सी बात है की ये टीवी पर नहीं दिखाया गया होगा |


अगर आपको याद हो तो, कुछ महीनो पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) दवारा भारत की मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) को ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया

था।

देश को गौरवानवित करते हुए, स्वास्थ्य की रक्षा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अन्य छह पुरस्कार विजेताओं के साथ ASHA Workers सम्मानित हुई। भारत में 2005 , ‘हर गांव में एक आशा’ नामक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare)की एक मुहीम , राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission) के हिस्से के रूप में नियोजित हुई| आशा वर्कर्स एक सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता(Community Healthcare Workers) है। भारत में दस लाख से भी ज्यादा आशा कार्यकर्ता देश के गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं (Primary Health Care Services )सुनिश्चित करती हैं |

महिलाओं और बच्चों के बीच-भौगोलिक ,सामाजिक और आर्थिक विषमताओं (geographical, social, economic challenges) को कम करने के उद्देश्य से-टीकाकरण प्रदान करना, गांव के अंदर अच्छी सेहत सुनीश्चित करना, संचारी रोग (Communicable Diseases) की रोकथाम-नियंत्रण,एवं

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना उनका मुख्य कार्य है| यदि ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुमकिन हो पाया तो उसका सारा श्रेय इन्हे ही जाता है| परंतु दुख की बात है, कि, इतना कुछ करने के बावजूद अपने ही देश में अपनी ही न्यूनतम वेतन के लिए इनहे लगातार सरकार से लड़ना पढ़ रहा है|


ट्विटर में विशेष दिलचस्पी रखने वाले हमारे प्रधानमंत्री जी बड़े उत्सव के साथ आशा कार्यकार्ताओ को एक स्वस्थ भारत सुनिश्चित करने में सबसे आगे बताते हैं।. परंतु ऐसी खोकली सरहना से अगर वो आशा कर्मचारियों को बहलाकर, अराजनैतिक और अंधभक्त व्यक्ति समान खामोश रखना चाहते थे तो, इस कार्य में वे विफल रहे|


28 सितंबर, 2022 भगत सिंह की 115 वीं वर्षगांठ पर ,चिलचिलाती उमस भरी दोपहर में यही आशा वर्कर्स, नियमित रूप से वेतन मिलने और बढ़वाने की मांग को लेकर गुजरात के गांधीनगर से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करने आई थी|

इनमे से एक आशा वर्कर से बातचीत के दौरान मालुम पढ़ा की वे सब गुजरात सरकार के सामने भी वेतन वृद्धि की बुहार लगा चुकि है, परंतु उन्हे राज्य-कैंद्र ताकातो के राजनीति में उल्झाकर केंद्र से मांग करने के लिए कह दिया गया| दोनो ही जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, ऐसे में केंद्र-राज्य की बहस बैबुनियाद है|



एक और आशा कार्यकर्ता ने बताया की कोविड के दौर मे ही नहीं, ये समय उससे भी पहले 2018 ये आर्थिक समस्या जारी है| केवल गांधीनगर से दिल्ली ही तक का आने जाने का बस का सफर Rs. 2000 से ऊपर का है| जो आशा वर्कर्स की एक महीने की सैलरी के बराबर है| ऐसे में, आप सोच सकते हैं की उनकी आर्थिक स्थिति कितनी गंभीर है| ऐसे में संवैधानिक प्रश्न पूछने की ज़रूरत है कि क्या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने उनके वेतन और भत्तों में वृद्धि करने की योजना पर विचार किया की नहीं; यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है, यदि नहीं, तो क्या भविष्य में सरकार द्वारा इस संबंध में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा; तथा पिछले पांच वर्षों के दौरान आशा कार्यकर्ताओं के वेतन और भत्तों में कितनी वृद्धि हुई है?


सावल से याद आया की प्रधान मंत्री जी आज कल रेवड़ियों की चर्चा में बढ़ी दिलचस्पी ले रहे, अत: इस संदर्भ में

जरा वे ये भी बता दे की पीएमओ द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को नियमित प्रोत्साहन राशि दोगुना करने से लेकर मुफ्त बीमा प्रदान किये जाने की 11 SEP, 2018 की घोषना जुमला थी, रेवाड़ी थी, या ‘सो कॉल्ड Welfare Scheme’’।


इसलिए गुजरात से आई आशा वर्कर्स की परशानी सिरफ उनकी ही नहीं परन्तु पूरे देश की आशा वर्कर्स की परिस्थिति को जनता और सरकार के सामने उजागर करती है|

इससे पहले, अनेक राज्यों से आशा कार्यकर्ता न्यूनतम वेतन और कर्मचारियों के लाभ की मांग को लेकर एकत्र हुए थे।


उनसे बात चीत के दौरान उनकी नेता चंद्रिका सोलंकी, जो पिछले 10 वर्ष से भी ज्यादा समय से आशा वर्कर्स को हक दिलाने में जट्टी है,आशाओ की समस्या को इस तरह बयान किया


"इन महिलाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर COVID-19 के दौरान चौबीसों घंटे काम किया। कई आशा कार्यकार्ताओ की मृत्यु COVID के कारण हुई। सरकार को आशाओं को मासिक मानदेय प्रदान करना चाहिए और उन्हें सरकारी कर्मचारियों (Permanent-Government Employees) का दर्जा देना चाहिए। ध्यान दे उन्हे फ्री टेल और गैस सिलिंडर नहीं चाहिए, मार्च से उन्हे वेतन मिला है, प्रधान मंत्री जी को याद दिला दे की देश केवल अंबानी और अदानी से ही नहीं चलता| उनके गुजरात मॉडल की तस्वीर आज जंतर मंतर पर सबके सामने हैं|"



References For This Report-


PIB Report of No. of Asha Workers in each state

https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1606212


Unfulfilled Promises

https://www.narendramodi.in/pm-modi-interacts-with-asha-anm-and-anganwadi-workers-across-the-nation-541418

https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=150&lid=226


https://behanbox.com/2020/06/12/promised-mostly-never-paid-rs-1000-covid-wage-to-million-health-work


PM's Tweet of appreciation on ASHA Workers

https://twitter.com/narendramodi/status/1528557271352938496


Photos and Videos of Chandrika Solanki, Founder of Mahila Shakti Sena, Gujarat leading the protest and that of Asha Workers from Gandhinagar at Jantar Mantar, Delhi.




धन्यवाद,

आपकी रिपोर्टर

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